Pradyumna Kumar Mahanandia और Charlotte Von Schedvin की कहानी भारत और स्वीडन दोनों जगह काफी मशहूर हैं।
यह घटना शुरू होता है 1949 में जब भारत के ओडिशा राज्य में एक गरीब परिवार के अंदर Pradyumna का जन्म हुआ था, इनका पूरा नाम प्रद्युम्न कुमार महानन्दिया है।
बचपन से ही प्रद्युम्न को चित्रकला में दिलचस्पी था लेकिन गरीब होने की वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, दिल्ली की आर्ट कॉलेज में पढ़ने के दौरान वो पैसे कमाने के लिए Connaught Place पे बैठकर लोगो की चित्र बनाया करता था, उन्होंने रास्ते पे बैठकर ही रूस की वेलेंटीना टेरेसकोबा की चित्र बनाया था, इसके अलावा उन्होंने इंदिरा गांधी की भी चित्र बनाया था।
लेकिन इसके बाद भी Charlotte Von Schedvin प्रद्युम्न के पास आने लगी, आने जाने के दौरान दोनों में दोस्ती हुई जो प्यार में बदल गया, प्यार होने के बाद दोनों ने शादी भी कर लिया लेकिन घूमने आयी Charlotte Von Schedvin का वीसा खत्म होने की चलते उन्हें स्वीडन वापस जाना पड़ा, क़रीब देड़ साल दूर रहने के बाद प्रद्युम्न स्वीडन जाने की सोचता है, लेकिन पैसे ना होने की वजह से उन्हें अपना सामान बेचना पड़ा जिससे केवल 1200 रुपए ही मिल सके, उन पैसों से प्रद्युम्न ने एक पुरानी साईकल खरीदा और उसी से स्वीडन जाने के लिए रवाना हो गए।
रास्ते में उन्हें बोहोत सारे दिक्कतों का सामना करना पड़ा पर वो नही रुके, और लगातार 6 महीने साईकल चलाकर 6000 किलोमीटर का सफर तय करके वो स्वीडन पौछ ही गए लेकिन स्वीडन की बॉर्डर पर सिपाहियों ने उन्हें रोक दिया क्योंकि वो यह बात नही मान रहे थे कि कोई इंसान इतना दूर साईकल से आ सकता है पर जब Charlotte Von Schedvin से संपर्क किया गया तो वोह बॉर्डर पर आती है प्रद्युम्न को लेने के लिए।

