पुनर्जन्म यानी Rebirth, इस विषय को विज्ञान अभी तक समझ नहीं पाया है, और पुनर्जन्म वाली बात को विज्ञान मानता भी नहीं है और यह सवाल एक रहस्य बन कर है। लेकिन दुनिया के बहुत से धर्म ग्रंथ में पुनर्जन्म को मान्यता दिया गया है।
पुनर्जन्म
पुनर्जन्म का मतलब है आपकी आत्मा का एक शरीर से दूसरे शरीर में प्रवेश करना। सीधी भाषा में कहें तो जब आप की मृत्यु हो जाती है, उस समय आपकी आत्मा आपके शरीर से निकल कर किसी अन्य शरीर में चला जाता है।
Law Of Karma के मुताबिक अगर आप इस जन्म में अच्छे काम करेंगे तो अगले जन्म में भी आप इंसान के रूप में जन्म लेंगे, लेकिन अगर आप बुरे काम करेंगे तो अगले जन्म में आप किसी जानवर के रूप में जन्म लेंगे और आप तब तक जानवर के रूप में जन्म लेते रहेंगे जब तक आपके किए हुए सारे बुरे कर्मों का फल आपको नहीं मिल जाता है।
पुनर्जन्म की सच्ची कहानियां
हमारी दुनिया में ऐसी कई लोग सामने आ चुके हैं जिन्होंने दावा किया है उनका पुनर्जन्म होने को लेकर, और उसी के साथ साथ उन्होंने अपनी कुछ कहानियां भी सुनाई है दुनिया को।
पहली घटना साल 1956 की है। जब दिल्ली में गुप्ता परिवार में गोपाल नाम का एक बच्चे का जन्म हुआ। फिर जब गोपाल जब 2 साल का हुआ तो उसने अपने पिछले जन्म के बारे में बात करना शुरू कर दिया।
उसने कहा कि वह मथुरा में रहता था, और उसका नाम शक्तिपाल था। उसने बताया कि पिछले जन्म में उसका तीन भाई थे और उनमें से एक ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दिया था। इसके साथ उसने यह भी कहा कि उसके पास ‘Sukh Sancharak’ नामक एक मेडिकल दुकान भी है।
गोपाल की यह बातें सुनकर गोपाल के पिता ने छानबीन शुरू कर दिया। ओर वह चौक गए जब उन्होंने पाया कि वास्तव में 'सुख संचारक' के मालिक शक्तिपाल नामक एक व्यक्ति को उसके एक भाई ने मार डाला था।
यह सब बातें जब शक्तिपाल की परिवार को पता चला तो वह गोपाल से मिलने दिल्ली गए, वहां जाते ही गोपाल ने सभी को पहचान लिया, जिसके बाद वह मथुरा गए, और वहां जाते ही उन्होंने सब कुछ पहचान लिया उनके बच्चे, उनके दुकान, उनका परिवार।
दूसरी घटना है साल 1950 की, जब भोलेनाथ जैन के पुत्र निर्मल की मृत्यु हो गई smallpox कि वजह से। और फिर एक साल बाद साल 1951 में छटा गांव में B.L. Washarney के परिवार में एक बच्चे का जन्म हुआ। जिसका नाम प्रकाश रखा गया था।
प्रकाश क़रीब साढ़े चार साल की उम्र में अचानक बताया कि वह पहले कोसीकला गाँव में रहता था, और उसका नाम निर्मल था। जिसकी मृत्यु हो गयी थी।
फिर जब साल 1956 में उनके चाचा उन्हें कोसीकला गांव ले गए, तब उसने उसकी जिंदगी मैं घटित बहुत से घटनाओं को बताया। उसके बाद साल 1966 में भोलेनाथ जैन जब प्रकाश के बारे में सुना तो वह उनसे मिलने गए। और जैसे ही भोलेनाथ जैन वहां पहुंचे, प्रकाश ने उन्हें तुरंत पहचान लिया, जहां प्रकाश ने ऐसे कई घटनाएं बताए जो केवल निर्मल और उनके पिता को ही पता थीं।
तीसरी घटना है साल 1960 की, जब प्रवीण चंद्र की पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया। जिसका नाम उन्होंने राजुल रखा। लेकिन जैसे ही वह 3 साल की हुई, वैसे ही उसने अपने पिछले जीवन के बारे में बताने लगे।
उसका कहना था कि उसका नाम गीता था और वह जूनागढ़ जिले की रहने वाली थी। फिर जब राजुल के दादाजी ने इस बात की जांच किया तो पता चला साल 1959 में जूनागढ़ निवासी गोकुलदास ठक्कर ने अपनी बेटी को खो दिया था जब वह केवल ढाई साल की थी।
इसके बाद राजुल के दादा राजुल को ठक्कर परिवार से मिलने जूनागढ़ ले गए। और वहां, राजुल ने अपने पिछले जन्म के परिवार के हर एक सदस्यों की पहचान कर लिया, और एक मंदिर को भी उसने पहचान लिया जहां उनकी मां पूजा करती थीं।
इनके अलावा भी दुनिया में ऐसे बहुत से घटना घट चुका है, जो पुनर्जन्म होने को संभाबना को मान्यता देता है, और जिसे बिज्ञान भी अभी तक नही सुलझा सका।
क्या सच में पुनर्जन्म संभव है
दुनिया की ज्यादातर धर्मों में ही पुनर्जन्म होने की संभावना को मान्यता दिया गया है लेकिन अगर बात करें वैज्ञानिक तरीके की, तो विज्ञान अभी तक पुनर्जन्म को नहीं मानती है और अभी तक पुनर्जन्म के सिद्धांत को भी ठीक से समझ नहीं पाया है।
इसके अलावा पुनर्जन्म सच है, यह साबित करने के लिए कोई तरीका भी हमारे पास मौजूद नहीं है इसीलिए विज्ञान के तरफ से पुनर्जन्म एक कल्पना मात्र है, और इसीलिए हम कह सकते हैं पुनर्जन्म संभव है या नहीं इस सवाल का जवाब एक रहस्य बन कर है।

