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ISRO क्या है, इतिहास, उद्देश्य और उपलब्धियां। About ISRO

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About isro,

ISRO क्या है

ISRO (Indian Space Research Organisation) भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है, जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है। यह अंतरिक्ष विभाग (DOS) के तहत संचालित होता है, जिसका देखरेख सीधे भारत के प्रधान मंत्री द्वारा देखा जाता है।

ISRO अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों, अंतरिक्ष अन्वेषण और संबंधित प्रौद्योगिकियों के विकास से संबंधित कार्यों को करने के लिए भारत में प्राथमिक एजेंसी है।

ISRO का इतिहास

भारत में आधुनिक अंतरिक्ष अनुसंधान का पता साल 1920 के दशक में ही लगा लिया गया था, पर भारत में संगठित अंतरिक्ष अनुसंधान का गठन विक्रम साराभाई और होमी भाभा के नेतृत्व में ही हुआ था।

साल 1962 में विक्रम साराभाई के आग्रह पर प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy) के तहत The Indian National Committee for Space Research (INCOSPAR) की स्थापना किया था, पर बाद में इंदिरा गांधी के प्रशासन के तहत INCOSPAR को ISRO द्वारा अधिगृहीत कर किया गया था।

जिसके बाद साल 1972 में विशेष रूप से भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विकास का अवलोकन करने के लिए एक अंतरिक्ष आयोग और अंतरिक्ष विभाग (DOS) की स्थापना की गई और इसरो को DOS (Department of Space) के अंतर्गत लाया गया था।

ISRO की शुरुआती दिनों में रॉकेट के पुर्जों को अक्सर साइकिल और बैलगाड़ियों पर ले जाया जाता था।

ISRO की उपलब्धियां

गठन के बाद इसरो ने भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट बनाया, जिसे 19 अप्रैल 1975 को सोवियत संघ द्वारा लॉन्च किया गया था। 

साल 1975 में आर्यभट्ट सेटेलाइट छोड़ने के बाद इसरो ने अन्य कई सेटेलाइट को लॉन्च किया है।

जैसे IRS (Indian Remote Sensing Satellite) जो पृथ्बी और धरती पर निगरानी रखता है और दूसरा है INSAT (Indian National Satellite System) जो देश की दूरसंचार, प्रसारण, मौसम विज्ञान और खोज और बचाव की जरूरतों को पूरा करने के लिए काम करता है।

इसके साथ साथ इसरो ने Satellite Launching Vehicle का भी निर्माण किया था, पहले पहले इसरो ने SLV Vehicle को इस्तेमाल करता था लेकिन जैसे-जैसे इसरो आगे बढ़ता गया वैसे-वैसे Satellite Launching Vehicles भी उन्नत होते गए, और वर्तमान समय मैं इसरो के पास SLV के अलावा ASLV, PSLV और GSLV Satellite Launching Vehicle मौजूद है।

इसके अलावा इसरो ने GPS के लिए Gagan Satellite Navigation System और नेवीगेशन के लिए Navigation with Indian Constellation (NavIC) सेटेलाइट का निर्माण भी किया है।

इसरो ने Chandrayaan-1 मिशन के तहत चांद पर पानी खोजने वाला पहला space agency बनी और Mangalyaan-1 मिशन के तहत पहली कोशिश में मंगल ग्रह पर पहुंचने वाला पहला space agency भी बना।

इसके साथ साथ इसरो भारत के defence system को भी मजबूत बनाने के लिए नए-नए अविष्कार करता रहता है जिससे भारत की सुरक्षाबलों को ताकत मिलता है।

ISRO का उद्देश्य

भविष्य में ISRO चंद्रमा पर रोवर उतारना, मनुष्यों को अंतरिक्ष में भेजना, चंद्रमा, मंगल, शुक्र और सूर्य के लिए अधिक मानव मिशन भेजना, एक अंतरिक्ष स्टेशन की तैनाती करना, बृहस्पति, यूरेनस, नेपच्यून और बाहरी ग्रहों के लिए मानवयुक्त मिशनों करना शामिल है।

उपसंहार

इसरो के कार्यक्रमों ने भारत को सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आपदा प्रबंधन से लेकर नागरिक और सेना के लिए भी गुरुत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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